लेखक: शिवम राज | कक्षा 10वीं

कोई कहे विकास है, कोई कहे झूठ का दौर।
मंचों पर वादों की तालियाँ बज रही हैं,
वहीं सड़क पर कुछ आवाज़ें दब रही हैं।
बिहार की गलियों में छात्र पूछ रहे सवाल,
छात्र माँग रहे हैं जवाब,
लाठी से मिला उत्तर, टूटा है एक ख़्वाब।
उधर लद्दाख से अरुणाचल तक बातचीत चली है,
हाथ मिलाने की तस्वीर फिर से खिंची है।
कोई कहता है, लिस्ट से मेरा नाम कटा है,
मणिपुर से पंजाब तक यही सवाल उठा है।
वोट सिर्फ़ उँगली का निशान नहीं,
ये गरीब की आख़िरी पहचान सही।
मैं किसी कुर्सी का नहीं, तिरंगे का गीत लिखता हूँ,
सवाल पूछना भी तो देशभक्ति है,
ख़ामोश रहना सबसे बड़ी विपत्ति है।
